रविवार, 9 सितंबर 2012

तेरा साथ हो तो

तेरा साथ हो तो काँटों में चलाना आता है मुझे 
पथ में पत्थर बिखरे तो तो फूल बनाना आता है मुझे 
तपिस आदित्य की हो तो चांदनी रात बनाना आता है मुझे 
तेरा साथ हो तो .................................................
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नदियों को बहवो के बिपरीत बहाना आता है मुझे 
समुन्दर की लहरों को हाथो में ले खेलना आता है मुझे 
असमान से चाँद को जमी में लाना आता है मुझे 
एक तेरा साथ हो तो .........................................
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पत्थर से पानी निकलना आता है मुझे 
तेरे लिए सिर्फ तेरे लिए देवो को जमी पर उतरना आता है मुझे 
केक्टस में भी फूल खिलाना आता है मुझे !!
तेरा साथ हो तो ....................................
.......................................................ऋतु दुबे

2 टिप्‍पणियां:

Aditipoonam ने कहा…

बहत सुंदर -बहुत खूबसूरत भाव भीनी रचना ---उनका साथ हो तो सब असंभव -संभव हो जाते है

"नेह्दूत" ने कहा…

Bahut badiya.......