गुरुवार, 30 मई 2013

kuchh  baate jo dil me aa gayi  shabdo me piro diya 
 जो गुजर जाती थी रात उन से मिलाने का ताना बाना बुनते हुए
अब वो बाना ही हाथो से फिसल गया न उम्मीदी की फिसलन से .
---------------------------ऋतु ---------------------------------------
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अब तो टूटे रिश्तो को जोड़ने से डर लगता है ,गाठो को खोलने से डर लगता है
उलझ जाये न जिन्दिगी और उन में ,अब तो दोस्तों के नाम से डर लगता है .
__________________________ऋतु __________________________
 आता है हुनर हमें अकेले पथ पर दूर तक जाने का ,
क्यू की किसी के साथ छूटने का डर नहीं होता .ऋतु    


तुझे चाहत के समुन्दर में डुबोदेगे हम पहले तैरना तो सीख ले
फिर ये न कहना की डुबोना ही था तो प्यार क्यू किया .
-----------------------------------ऋतु ------------------------------
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4 टिप्‍पणियां:

jyoti kashive ने कहा…

bahut hi shadaar baat.......

"नेह्दूत" ने कहा…

बहुत खूब...

"नेह्दूत" ने कहा…

बहुत खूब...

Aparna Sah ने कहा…

wah kya khoob likha...