सोमवार, 21 मार्च 2011

टेसू के फूल


वन वन आच्छादित पत्र बिहीन पेडो पर टेसू के फूल ,
मेरा ह्रदये भी रीता भावना रहित टेसू के पत्र विहीन  पेड़ सा
टेसू  की डालो डालो अब चिडियों का बसेरा ,
मेरे ह्रदय आँगन मे अब तक सोया सबेरा ,
महुवे की मादकता से वन भये  मतवाले ,
ऋतुराज बसत का रंग है अनोखा ,
चाहू और है उमंग  छाई  मतवाली ,
गोरी के गालो मे छाई अबीर की लाली ,
अमररायियो  में चली  पुरवाई मतवाली ,
उमगो ने ली धीरे धीरे  फिर अगड़ाई ,
पलाश के फूल विरहनी की ह्रदये मे आग जलाई ,
धधक उठा फिर हृदये की सुप्त अभिलाषाए ,
झर उठे गोरी की आँखों से भी टेसू  के फूल.इरा ऋतु पांडे २१/०३/२०११

12 टिप्‍पणियां:

ashok gulati ने कहा…

chaliye,dukh ke baddal chate, tesue ke phoolon ke tarhen khushi ke aanso to nikle. gum ke baddal chat gaye,asi purva bahi hai, khushion ka suraj aap ke man mein Uday to hua hai. Dr. Ashok Gulati

Ravi Tiwari ने कहा…

bahut khoob......in tesu ke phulo ne to jeevan me khushiya la di hai....jai ho....bahut hi sundar

krish ने कहा…

Bahut badia Bhabhi ji

krish ने कहा…

you always make your devar to feel proud of u

sadhana ने कहा…

वन वन आच्छादित पत्र बिहीन पेडो पर टेसू के फूल ,
मेरा ह्रदये भी रीता भावना रहित टेसू के पत्र विहीन पेड़ सा

बहुत ही सुन्दर ऋतु...!!!!

arun pandey ने कहा…

इतनी खुबसूरत कविता ? वाह , ये पढ़कर तो वसंत की मादकता स्वत: छ ज रही है , लगता है चारो तरफ वसंत ही वसंत , बहुत सुन्दर ..

bilaspur property market ने कहा…

धन्यवाद आपने मेरे ब्लॉग पर आये इस का मैं आभारी हूँ
...............
सच पलास के फूल कुछ ऐसे ही है.........
बहुत सुन्दर भाव ....
गोरी के गालो मे छाई अबीर की लाली ,
अमररायियो में चली पुरवाई मतवाली

manish jaiswal
bilaspur

H P SHARMA ने कहा…

कविता के भाव बहुत सुंदर है.

ZEAL ने कहा…

Sentiments are beautifully poured in this beautiful creation .

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

वन वन आच्छादित पत्र विहीन पेड़ों पर टेसू के फूल ,
मेरा ह्रदये भी रीता भावना रहित टेसू के पत्र विहीन पेड़ सा
टेसू की डालों डालों अब चिडियों का बसेरा ,
मेरे ह्रदय आँगन मे अब तक सोया सबेरा ,
महुवे की मादकता से वन भये मतवाले ,
ऋतुराज वसंत का रंग है अनोखा ,
चहुं और है उमंग छाई मतवाली ,
गोरी के गालोँ मे छाई अबीर की लाली ,
अमराइयों में चली पुरवाई मतवाली ,

उमंगों ने ली धीरे धीरे फिर अंगडाई ,
पलाश के फूल विरहिणी के ह्रदय मे आग जलाये ,
धधक उठी फिर हृदय की सुप्त अभिलाषाएं ,
झर उठे गोरी की आँखों से भी टेसू के फूल !!!
dhanyvad ira ji pls see , i have moderated some grametical words if u like pls correct these -it will be beautiful
surendr kumar shukla bharamar5

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

वन वन आच्छादित पत्र विहीन पेड़ों पर टेसू के फूल ,
मेरा ह्रदये भी रीता भावना रहित टेसू के पत्र विहीन पेड़ सा
टेसू की डालों डालों अब चिडियों का बसेरा ,
मेरे ह्रदय आँगन मे अब तक सोया सबेरा ,
महुवे की मादकता से वन भये मतवाले ,
ऋतुराज वसंत का रंग है अनोखा ,
चहुं और है उमंग छाई मतवाली ,
गोरी के गालोँ मे छाई अबीर की लाली ,
अमराइयों में चली पुरवाई मतवाली ,

उमंगों ने ली धीरे धीरे फिर अंगडाई ,
पलाश के फूल विरहिणी के ह्रदय मे आग जलाये ,
धधक उठी फिर हृदय की सुप्त अभिलाषाएं ,
झर उठे गोरी की आँखों से भी टेसू के फूल !!!
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surendr kumar shukla bharamar5

बेनामी ने कहा…

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