शनिवार, 16 अप्रैल 2011

अहसास

लहरों का उठना 
उठा कर सम्हलना
मचल कर ,गिरना दिल में हूक का  उठना
उठ कर दर्द का अहसास
का होना .दर्द के अहसास से डरना
जैसे सर्पीली पगडंडियों  से
खुद को सम्हालना ,आसमां मे चपला की चमक ,
फिर निर्दोष वृक्ष पर गिरना ,
जैसे जीवन के सच को समझना.

5 टिप्‍पणियां:

sadhana ने कहा…

bahut hi gahari bat kahi hai tumne ...bahut achha ...!!!

Rahul Singh ने कहा…

रहस्‍यवाद के रहस्‍य का संधान.

Nalini Dubey ने कहा…

yahi to jeewan ka sach hai..

H P SHARMA ने कहा…

yahaa teesree line mai हुक ko हूक kariye
aur उठाना ko उठना

man ke ahsaaso ko prakriti keeleela se badhiya joda hai

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com